जननी तेरा स्मरण…

जननी तेरा स्मरण करता हूँ, प्रतिपल श्वांस-प्रश्वांस में |

ह्रदय मंदिर में तू बसी है, मेरे रोम-रोम विश्वास में |

गोदी में तेरे खेल कूद कर बड़े हुए हैं |

 घुटनों के बल सरक-सरक कर खड़े हुए हैं |

तेरी कृपा से जीवन का सब सुख पाया है,

 अमृत-सा नीर पिया अन्न खाया है |

तेरी कृपा से बढ़कर संसार का कोई उपहार नहीं |

 जिस क्षण तेरा स्मरण न हो, इससे बड़ा अपराध नहीं |

इस नश्वर संसार में, तेरा अस्तित्व ही शाश्वत है |

 तेरी सेवा सभी व्रतों से बड़ा व्रत है ||

 क्या दूँ तुझे ?

शरीर, रक्त, मांस, प्राण सब कुछ तेरा है |

 तू ही प्रकाशपूंज है और सारा संसार अँधेरा है |

प्रेम, श्रद्धा, भक्ति का एक भाव बार है भीतर |

 तेरी प्रकाश की आभा से चमक रहा है अंतस |

 हे मातृदेवता !  मेरे प्रत्येक कर्म में तू विराज |

पुण्यपथ का अनुगामी, अपना ले मुझको आज |

 लखेश्वर चंद्रवंशी

 संपादक : भारत वाणी

By lakhesh

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