… ख़याल आया है ?

तेरे जन्म लेते ही

सबसे पहले जिसने तुझे

निज आँचल में उठाया |

लड़खड़ाते पैरों से जब तू चलता था

और गिरता था

तब अपनी गोदी का सहारा देकर

जिसने तुझे उठाया |

जिसके एक स्पर्श ने

तुम्हारे होठों को

किल्कारी मारकर हँसना सिखाया |

जिसकी ममता ने

अधरों को सबसे पहले

“माँ”  कहना सिखलाया |

घाव लग जाने पर

जिसके वनों से तुम औषधी पाते हो,

अपनी प्रिये को मनाने 

जिसकी फुलवारी से फूल लाते हो |

जीवन का सारा  सुख और आनंद

तुमने जिसकी कृपा से पाया है |

हे मेरे देशवासी युवा साथियों  !

जरा हृदय पर हाथ रखकर सोचो कि

क्या तुम्हें इस भारत माँ का 

तनिक भी ख़याल आया है ?…

 

 

– लखेश्वर चंद्रवंशी “लखेश”

संपादक : भारत वाणी

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