तू याद आती है…

 

सतत परिश्रम से जब मैं थक जाता हूँ |
स्वयं की उलझनों से जब ऊब जाता हूँ |
अनायास मन विकल हो उठता है |
धैर्य हृदय का जब छूटता है |
आशाओं पर जब निराशा 
अधिकार ज़माने लगती है |
आत्मविश्वास पर जब संदेह 
परदा चढ़ाने लगती है |
तब  तू मुझे याद आती है 
संवेदना बनकर मुझे जगाती है |
अकेलेपन में मेरी संगिनी बनकर 
साथ निभाती है |
तू गुरु का आशीर्वाद है 
जो प्रेरणा बनकर आती है |
तू सूर्य का प्रकाश है,
तेजस्विता बनकर जगाती हो |
सागर में समानेवाली तू ही सरिता है |
हृदय से निकालने वाली तू वास्तव में कविता है |

                                                                                               – लखेश्वर चंद्रवंशी ‘लखेश’

 

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s