“प्रेम- लक्षण”

जिसे देखते ही आँखों को सुकून मिल जाए |
वह सूरत आँखों से सीधे दिल में उतर जाए ||
उसके बिना हृदय व्याकुल हो जाए 
और हर पल उसकी याद सताए |
वो सामने रहे न कभी 
फिर भी हर वक्त, हर जगह 
वही शख्स नज़र आए | 
उसकी इक आवाज सुनने को 
कान तरस जाए |
गर दिखे उसकी सूरत, सुने उसकी आवाज 
तो हृदय ख़ुशी से गदगद हो जाए |
आप अपने प्रियजनों के साथ बैठे हैं,
उनसे कुछ बतिया रहे हैं |
सहसा आपका ध्यान कहीं और लग जाए |
किसी की कमी खल रही है आपको
ये बात, आपके साथ और भी लोग 
साफ जन जाए |
उसकी याद में कुछ अच्छी कविता बन जाए,
शायरियों से कापी सज जाए |
तो समझिये भैया,
कि तुझे प्यार हो गया है |
किसी कि सूरत आँखों से 
सीधे तुम्हारे जेहन में उतर गया है ||

– लखेश्वर चंद्रवंशी ‘लखेश’    

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