संवेदना आवश्यक है, परंतु यह जागृति का लक्षण नहीं !

सारे देश में आक्रोश है, यह जानते हुए भी इस दौरान दिल्ली, सागर, जबलपुर तथा नागपुर आदि स्थानों पर बलात्कार … पढ़ना जारी रखें संवेदना आवश्यक है, परंतु यह जागृति का लक्षण नहीं !

चुनौती अनेक समाधान एक

श्री संत गजानन महाराज शेगांव संस्थान के व्यवस्थापकीय विश्वस्त तथा स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह समिति, महाराष्ट्र राज्य के अध्यक्ष श्रद्धेय श्री शिवशंकर भाऊ पाटिल के साथ संवाद पर आधारित लेख ।

अपने अस्तित्व से धर्म नहीं है वरन् धर्म के कारण हमारा अस्तित्व है। धर्म है तो हम हैं। इसलिए सारी समस्याओं का उत्तर केवल धर्म की संस्थापना है। धर्मप्रणीत राष्ट्र के रूप में ही भारत का गौरव है।

       bhau copyश्रद्धेय श्री शिवशंकर भाऊ पाटिल महाराष्ट्र राज्य का ऐसा नाम है जिसका उच्चारण करते ही मन श्रद्धा से नत हो जाता है। सामान्य ग्रामवासियों से लेकर महानगरों का प्रबुद्ध समाज उन्हें हृदय से मानता है। इस श्रद्धामय उपलब्धि के कारणों को समझें तो एक कुशल प्रबन्धक के रूप में तो वे जग विख्यात हैं ही, परंतु अपनी प्रत्येक कृति को ईश्वरीय कार्य के रूप में पूर्णता तक ले जाने की अद्भुत प्रतिभा के वे धनी भी हैं। मैंने उन्हें पहली बार 2008 में देखा था और गत सप्ताह 28 नवम्बर को उनका दर्शन कर पाया। इस अल्प भेंट में उनके विचारों से भी अवगत होने का भाग्य प्राप्त हुआ। अपने 4 मिनट के अल्प संवाद में उनके प्रत्येक शब्द मन में अमिट छाप छोड़ते चले गए। उन्होंने जो भी कहा उसमें वर्षों की तपस्या और सामाजिक कार्यों के प्रति उनके चिन्तन तथा अनुभूति का ओज प्रतिविम्बित हो रहा था। उनके विचारों की माला मेरे मन, बुद्धि और हृदय में सदा के लिए अंकित हो गई। उनके सान्निध्य से प्राप्त विचारों को देशवासियों तक पहुंचाना समय की मांग है।     

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