स्तब्ध अमेरिका, चिन्तित समाज

America_Trasadiक्रिसमस की तैयारी में जुटा अमेरिकी समाज सहित संसार के तमाम देश तब स्तब्ध रह गए जब 14 दिसम्बर को न्यूटाउन के सैंडी हुक एलिमेंटरी स्कूल में एक सिरफिरे युवक ने 20 बच्चों सहित 27 लोगों को गोलियों से छलनी कर दिया। स्कूल में हुई इस गोलाबारी को अब तक के इतिहास में सबसे घातक हमलों में गिना जा रहा है। दुनिया के सबसे सभ्य और शक्तिशाली समझे जानेवाले अमेरिकी समाज में ऐसी घटना का घटित होना बहुत ही चिन्ताजनक है। 

एक ओर जहां अमेरिका की शक्ति-सम्पन्नता से संसार की जनता प्रभावित है तो दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं सबको हैरान करती है कि क्यों एक व्यक्ति पाशविक मानसिकता का परिचय देते हुए निर्दोष, विशेषकर मासूम बच्चों को बेरहमी से मौत के घाट उतार देता है। इस त्रासदी पूर्ण घटना के बाद व्हाइट हाउस के प्रेस कक्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की आंखों में भी आंसू आ गए। उन्होंने कहा, इस घटना से हमारा दिल टूट गया। इस तरह की त्रासदियों को रोकने के लिए भविष्य में अर्थपूर्ण कार्यवाई करने के लिए बिना राजनीति के एकजुट होना चाहिए। 

इससे पहले 2007 में वर्जिनिया में हुए हमले में 32 लोग मारे गए थे। पिछले दो दशकों में बंदूक सम्बंधी ढीले कानूनों के कारण अमेरिका में 100 से ज्यादा लोगों की मौत शिक्षण संस्थानों में हो चुकी है। जबकि ओरेगन के शॉपिंग मॉल, विस्कॉन्सिन के गुरुद्वारे, एयुरोरा फिल्म थियेटर की या फिर शिकागो की एक सड़क की घटना हो, इस सभी घटनाओं में निर्दोष लोग मारे गए हैं। इस प्रकार आए दिन अमेरिकी समाज में इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। फिर भी बंदूक रखने को मूलभूत अधिकार के रूप में मान्यता मिलने तथा शस्त्र उद्योग से जुडी लॉबी के चलते अमेरिका में बंदूक संस्कृति पर रोक लगाने का साहस कोई जुटा नहीं पा रहा है। ऐसे में अमेरिकी समाज प्रशासन तथा वहां की सरकार को इस चुनौती का प्रत्युत्तर ढूंढना होगा।

सैंडी हुक  स्कूल में अंधाधुंध गोली चलाकर 27 लोगों को मारने वाला हमलावर एडम लांजा कोई कुख्यात अपराधी नहीं था। उसके पड़ोसियों के अनुसार वह शर्मीले स्वभाव का 20 वर्षीय युवक था। और ज्यादातर लोगों को उसके बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। वह किसी से ज्यादा घुलता-मिलता भी नहीं था। वहां की पुलिस अब इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि एडम कहीं पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का शिकार तो नहीं था। 

ज्ञात हो कि एडम के माता-पिता का तलाक हो गया था। उसके पिता पीटर लांज़ा स्टैमफोर्ड चले गए थे जहां उन्होंने बाद में दूसरी शादी कर ली थी। जबकि एडम की मां नैन्सी अपने पारिवारिक घर में ही एडम के साथ रहती थीं। बताया जाता है कि वह भी सैंडी स्कूल में अध्यापक थीं। स्कूल में तबाही मचाने से पहले एडम ने अपनी मां की गोली मारकर हत्या कर दी। एडम की परवरिश और पारिवारिक ताने-बाने में निश्चित रूप से इस घटना के तार जुड़े हो सकते हैं। 

एडम जैसी पारिवारिक स्थितियां भी अमेरिका में बहुतायत में हैं जो कि बहुत चिन्ताजनक है। ऐसे लोगों के पास घातक हथियार भी मौजूद हैं, तो ऐसी घटना का होना स्वाभाविक है। पर सवाल उठता है कि इस तरह की जघन्य अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए राजनीतिक तत्परता क्यों नहीं दिखाई जाती ? निर्दोष लोगों की जान से कीमती क्या हथियार लॉबीस्टों के हित हैं ? ऐसे में अमेरिकी सांसदों के लिए यह उचित समय है कि वे शस्त्र कानून में संशोधन कर ऐसे अपराधों को होने से रोके। पर ऐसी त्रासदीपूर्ण घटनाओं के लिए क्या केवल हथियारों की खुली छूट जिम्मेदार है या वहां के समाज की प्रवृत्ति ?

परिवारिक वातावरण का अभाव, तलाक की वजह से स्वजनों के बीच मनमुटाव और बढ़ता भोगवाद ऐसी घटनाओं के लिए कारणीभूत है। इसलिए परिवार संस्कृति की स्थापना, जीवनभर स्वजनों के साथ रहना और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देकर इसके विकास पर ध्यान देना, अमेरिकी समाज के लिए आवश्यक है। ऐसे में देखना होगा कि आज के समय में ज्यादा आसान शस्त्र कानून में बदलाव करना है कि संस्कृति में परंतु चिल्ड्रेन डिचेंस फंड के प्रमुख मैरियन राइट एडलमैन ने ऐसे जनसंहारों को रोकने के लिए राजनीतिक एकजुटता पर शंका जाहिर की है, जो की चिन्ताजनक है। लेकिन यह वर्ष जाते-जाते अमेरिकी समाज को ऐसा घाव दे गया जिसका दर्द लंबे समय तक उसे सालता रहेगा।  

– लखेश्वर चंद्रवंशी, 

नागपुर 

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