नशा का यह जूनून आहत करनेवाला है

smoking-Girlsएक तरफ देश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश और दुनिया में भारत का वर्णन “युवा देश” के रूप में कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षित युवा वर्ग आधुनिकता के नाम पर नशाखोरी को अपने जीवन शैली का अंग मानने लगे हैं। आज नशाखोरी से देश का हर गली, मोहल्ला, नगर, ग्राम, स्कूल, कॉलेज, पर्व, उत्सव आदि कुछ भी अछूता नहीं है। नशाखोरी का यह फैशन युवकों में ही नहीं, युवतियों में भी तेज गति से बढ़ रही है जो बेहद चिंताजनक है।

– लखेश्वर चंद्रवंशी ‘लखेश’

भारतीय नारी का अतीत संसार के अन्य नारियों से कहीं अधिक आदर्श और प्रेरणादायी रही है। आज भी करोड़ों महिलाएं चाहे वह शिक्षित हो अथवा निरक्षर, अपनी बुद्धिमत्ता, ममता, करुणा और मेहनत से परिवार, समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण कर रही है। आज भी भारतीय समाज दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है जहां परिवार को स्वास्थ्य, सुरक्षित और संस्कारवान बनाने में महारत हासिल है। इसका मुख्य कारण है कि हमारे समाज की स्त्रियां, जो भारतीय जीवन मूल्यों को अपने परिवार में सहजता से स्थापित कर उसे समृद्ध बनाती हैं। यदि ऐसा कहा जाए कि भारत की महानता के पीछे स्त्रीत्व की सबसे बड़ी भूमिका है, तो यह गलत नहीं होगा।

आज जिस तरह से दुनिया में बाहरी चमक-धमक और नशा की लत बढ़ी है, उसका प्रभाव निश्चित रूप से भारत में भी दिखाई देता है। हमारे देश के युवाओं में जिस तरह शराब, सिगरेट, बीड़ी, तम्बाखू, ड्रग्स आदि के प्रति आकर्षण बढ़ा है, बहुत चिंताजनक है। हजारों रुपये की नौकरी करनेवाले युवाओं से लेकर बेरोजगार, हताश और मौज-मस्ती में दिन गुजरनेवाले करोड़ों युवा इस नशा के शिकार हैं। एक तरफ देश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश और दुनिया में भारत का वर्णन “युवा देश” के रूप में कर रहे हैं, वहीं नशा के अधीन हो चुके युवाओं से उनके परिवारजन परेशान हैं, विशेषकर माताएं। प्रत्येक माँ अपनी बेटी के लिए योग्य वर की खोज करती है, उसका पहला मापदंड होता है कि वर किसी मद्य सेवन अथवा कोई अन्य नशा के लत में न पड़ा हो। युवती भी अपने लिए योग्य वर की तलाश में सबसे पहला यही मापदंड रखती हैं कि उसका पति शराबी न हो। यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि नशा के अधीन हो चुके परिवार कभी भी स्त्री जीवन के लिए उपयुक्त नहीं है। ऐसे में युवाओं में बढ़ते नशाखोरी के प्रति जागरूकता लाना अति आवश्यक है।

एक तरफ माता-पिता अपने पुत्र और पुत्रियों को उच्च शिक्षा देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए अनथक प्रयत्न करते हैं, तो दूसरी ओर शिक्षित वर्ग आधुनिकता के नाम पर नशाखोरी को अपने जीवन शैली का अंग मानने लगे हैं। आज नशाखोरी से देश का हर गली, मोहल्ला, नगर, ग्राम, स्कूल, कॉलेज, पर्व, उत्सव आदि कुछ भी अछूता नहीं है। नशाखोरी का यह फैशन युवकों में ही नहीं, युवतियों में भी तेज गति से बढ़ रही है जो बेहद चिंताजनक है। वर्ल्ड एंटी स्मोकिंग डे पर हुए एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय की 70 प्रतिशत युवतियां और 31 फिसद युवक ‘स्मोकर्स’ पाए गए। इनमें से हर कोई लगभग 14 सिगरेट रोज पीता है। बीस साल की उम्र तक पहुंचते ही युवा सिगरेट के आदी हो जाते हैं। करीब 83 फीसद युवा और 87 फीसद युवतियां सिर्फ मस्ती के लिए सिगरेट पीती हैं। हाई सोसाइटी की महिलाएं सिगरेट पीने को अपना स्टाइल मानती हैं। महिलाओं में यह लत तेजी से पनप रही है।

कल्पना कीजिए कि, यदि भारत की सभी महिलाएं और स्त्रियां शराब, तम्बाखू, ड्रग्स आदि के नशा से ग्रस्त हो जाएं, तो इस देश का क्या हाल होगा ? परिवारों और समाज की क्या स्थिति होगी ? सोचकर ही मन घबरा जाता है। ऐसे अनगिनत महिलाएं हैं जिनके पति ने उन्हें त्याग दिया है अथवा उनका निधन हो गया है, फिर भी पवित्रता, पुरुषार्थ और ममत्व के बल पर अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों की सेवा और बालक-बालिकाओं को शिक्षित, सक्षम और संस्कारवान बनाया। ऐसे में भारतीय समाज की उन करोड़ों महिलाओं को नमन करने का मन होता है, जिन्होंने भारतीय समाज को नशा के गर्त से उबारने का महान प्रयत्न किया है। पर आज जिस तरह फैशन, स्टाइल और आधुनिकता के नाम पर नशा का जूनून युवतियों में दिखाई दे रहा है, वे बड़ी आहत करनेवाली है। भारतीय समाज का रीढ़ स्त्री जीवन है; यदि वह ही बहकने लग जाए तो समाज को कौन बचाएगा?

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