अरुणाचल में अरुण-ज्योति

Along the road from Mechuka to Along

कहीं धूप कहीं छांव, चांग घरों से सुसज्जित गांव
हृदय में अपनत्व लिए हुए, मृदुगान कंठ में लिए हुए
हरियाली से अभिभूत माँ का आंचल देखा है।
देश का ऐसा ममतामयी अरुणाचल देखा है।।

arunachal-2

god_mail-arunachal

अनेक देव, अनेक बोली, गिरि अम्बर से करे ठिठोली
स्वच्छंद हृदय उन्मुक्त मुस्कान, है उनकी बस यही पहचान
आधुनिकता के इस होड़ में, वहां के जीवन में सहजता देखा है।
ऐसा अभिषिक्त अरुणाचल देखा है।।

arunachal-3

गांव बूढा का आदेश, आज्ञापालन यहां विशेष
भोले-भले लोग यहां, स्नेहमय बातें करते बयां
सारा गांव मिलकर त्योहार मनाता, नृत्य गीत में भी ऐक्य दर्शाता।
ऐसा अदभुत संगठन देखा है, ऐसा रमणीक अरुणाचल देखा है।।

arunachal-4

संस्कृति प्रथम बाद में स्वारथ, मिलकर सभी करते परमारथ
धर्मान्तरण का यहां घोर अत्याचार, बंदूक के बल पर करते प्रचार
जीवन दुस्सार बना हुआ, हृदय रक्त से सना हुआ।
इस दुःखद परिस्थिति में भी, उन्हें निश्चल मुस्काते देखा है।
ऐसा अदभुत अरुणाचल देखा है।।
arunjyoti copy

सैंकड़ों कार्यकर्ता अपना जीवन दिए हुए, विजिगीषु वृत्ति लिए हुए।
शिक्षा, संस्कृति का फूल खिलाते, राष्ट्रप्रेम का अलख जगाते।
आतंकवाद, धर्मान्तरण और व्याप्त शिक्षा का अंधकार
इन सब चुनौतियों के उत्तर में,
फैलाएं ‘अरुण-ज्योति’ का प्रकाश।

donyi-polo
दें सहयोग तन मन धन से, हम सब आत्मीय जन बनकर।
राष्ट्र के इस अनुपम वृक्ष को, सींचे अमृत बूंद बनकर।।

– लखेश्वर चंद्रवंशी ‘लखेश’

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s