भारत-पाक सम्बन्ध : बात तो करनी ही होगी, ऐसे या वैसे!

indo-pakभारत सदैव सबका हित चाहता है, उस सब में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है। पाकिस्तान को यह बात समझना होगा कि उसे किस तरह की वार्ता कबूल है,- शांति की या कोई और? वरना नियति उसका निर्णय स्वयं लेगी।

– लखेश्वर चंद्रवंशी ‘लखेश’

नि:संदेह पाकिस्तान से बात तो करनी ही होगी, क्योंकि यही एक उपाय है जो युद्ध को टाल सकता है। भारत नहीं चाहता कि शत्रुभाव कभी अपने पड़ोसियों के आपसी संबंधों में स्थायी रूप से बना रहे। स्थिति को समझते हुए पाकिस्तान को भी अपना शत्रुभाव ख़त्म करने की दिशा में पहल करनी होगी। भारत ने सदैव शांति के पथ को अपनाया है। पाकिस्तान को भारत के इस नीति का अनुसरण करना होगा। यह उसके लिए भी बहुत जरुरी है। इसी में दोनों देशों की सीमा में रहनेवाले जनता की भलाई है। पाकिस्तान को समझना होगा कि यमन, ईरान, इराक, सीरिया, अफगानिस्तान और खुद उनका अपना पाकिस्तान आतंकवाद, आपसी कलह और युद्ध जैसे स्थिति से जूझ रहा है। ऐसे में भारत के ‘विश्व कल्याण, वैश्विक शांति और बहुमुखी विकास’ की नीति का समर्थन करते हुए उसे अपनी नीति स्पष्ट करनी होगी।

सारी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान बना कैसे? भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान मुस्लिम कट्टरता, निहित स्वार्थ, कमजोर नेतृत्व और असहमति के चलते तत्कालीन नेता गांधीजी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद जिन्ना, अब्दुल कलाम आजाद आदि के राजनीतिक सत्ताकांक्षा के कारण भारत को विभाजन का दर्द झेलना पड़ा। इस विभाजन के विद्वेष ने लाखों निरपराध लोगों के प्राण हर लिए। आज भी वह पीड़ा मन को चुभती है। यह पीड़ा और भी बढ़ जाती है जब पाकिस्तान से कोई आतंकी घुसपैठिया भारत की धरती पर आतंकी हमलों को अंजाम देता है। भारत द्वारा सबूत दिए जाने के बावजूद पाकिस्तान अपने देश में पल रहे आतंकियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करता।

हाल ही में जब 10-11 जुलाई में रूस के उफा शहर में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तानी के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुलाकात हुई तो आतंकवाद का मुद्दा छाया रहा। 26 नवम्बर, 2008 को पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में हमला किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड आतंकी जकीउर रहमान लखवी के खिलाफ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को कार्रवाई करने के लिए कहा ताकि दोनों देशों के बीच शांति बनी रहे। इस बैठक में पाकिस्तान ने मुंबई हमलों की जांच को आगे बढ़ाने का समर्थन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी 2016 में पाकिस्तान में होनेवाले सार्क सम्मेलन में शामिल होने का आमंत्रण भी स्वीकार कर लिया। सारी दुनिया ने भारत-पाक वार्ता बहाली के सकारात्मक पहल का स्वागत किया।

लेकिन इस सकारात्मक बातचीत के तीन दिन बाद ही फिर से पाकिस्तान की ओर से नकारात्मक बयानबाजी शुरू हो गई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज ने रूस के उफा में हुए समझौते से पलटते हुए कहा कि भारत को मुंबई हमले पर और सबूत देने होंगे। उन्होंने कहा कि जब तक कश्मीर का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं होगा, भारत के साथ कोई वार्ता प्रक्रिया नहीं की जाएगी। सरताज अजीज के इस बयान के बाद भारत-पाक वार्ता के औचित्य पर ही सवाल उठने लगा। इतना ही नहीं तो पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया। भारतीय सीमा के गांवों पर गोलीबारी की। पाकिस्तान के इस उद्दंडता का जवाब देते हुए हमारे 2 सैनिक शहीद हो गए और एक महिला की मौत हो गई।

एक तरफ भारत जहां पाकिस्तान से वार्ता करना चाहता है, अनावश्यक युद्ध टालना चाहता है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान हर बार संघर्षविराम का उल्लंघन कर भारतीय सीमा पर गोलीबारी करता है। पाकिस्तान को इतिहास के उस सच्चाई को भी याद रखना होगा कि भारत ने 1948, 1965, 1971 और 1999 में युद्ध के दौरान पाकिस्तान को परास्त किया था। आज भारत में पूर्ण बहुमत की मजबूत मोदी सरकार है। देश में अब तक के सभी सरकारों से अधिक सक्रिय और दृढ़ प्रधानमंत्री विद्यमान है। यदि पाकिस्तान भारत के इस शांति वार्ता को स्वीकार नहीं करेगा तो उसे भयंकर परिणाम भुगतना पड़ सकता है।

पाकिस्तान यूं तो कई बार अपने चीनी सहयोग के बूते पर न्यूक्लियर शक्ति होने का दावा करता है, पर अपनी बात बोलते समय वह भारत की महाशक्ति और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की उदात्त छवि को भूल जाता है। दूसरी ओर पाकिस्तान की छवि आज आतंकियों को पोषित करनेवाला देश के रूप में दुनिया में ख्यात है। लादेन का खात्मा भी पाकिस्तान की भूमि पर अमेरिका ने किया था। इसलिए उसे अपने ऊपर लगे आतंकियों को पोषित करने की सच्चाई वाला जो कलंक लगा है, उसे धोना होगा। पाकिस्तान अपने में अन्तःकरण में झांके और समझे कि उसे किस तरह दुनिया में अपना छवि बनाना है।

पाकिस्तान, जो कि भारत की भूमि से अलग होकर एक मुल्क बना है, आज वह सबसे ज्यादा भारत को पीड़ा पहुंचा रहा है। भारत सदैव सबका हित चाहता है, उस सब में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है। पाकिस्तान को यह बात समझना होगा कि उसे किस तरह की वार्ता कबूल है,- शांति की या कोई और? वरना नियति उसका निर्णय स्वयं लेगी।

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s