सुलगता यमन और भारत का ‘ऑपरेशन राहत’ की सफलता

पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह

‘यमन’ आज गृहयुद्ध की भयंकर विभीषिका से धधक रहा है। इस गृहयुद्ध के चलते वहां की स्थानीय जनता के साथ ही दुनिया के अनेक देशों के लोगों का जीवन खतरे में हैं। भारत सरकार ने बम-गोलों और गोलियों के बीच घिरे हिंसाग्रस्त यमन के अलग-अलग क्षेत्रों से अबतक 4000 भारतीय नागरिकों और दुनिया के 25 देशों के 232 नागरिकों को सुरक्षित निकाला। भारतीय नौसेना, वायुसेना और विदेश मंत्रालय के बेहतर समन्वय और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की अगुवाई में मिली इस सफलता ने विश्वमंच पर भारत का लोहा मानने के लिए मजबूर कर दिया है।

– लखेश्वर चंद्रवंशी ‘लखेश’

मध्य-पूर्व एशिया का एक अरबियन देश ‘यमन’ आज गृहयुद्ध की भयंकर विभीषिका से धधक रहा है। इस गृहयुद्ध के कारण वहां की स्थानीय जनता के साथ ही दुनिया के अनेक देशों के लोगों का जीवन खतरे में हैं। यही कारण हैं कि भारत सहित रूस, इंडोनेशिया, चीन, मिस्र, सूडान, जिबूती जैसे देश अपने नागरिकों को सुरक्षित अपने देश में वापस लाने के लिए अनथक प्रयत्न कर रहे हैं। भारत सरकार ने बम-गोलों और गोलियों के बीच घिरे हिंसाग्रस्त यमन के अलग-अलग क्षेत्रों से अबतक 4000 भारतीय नागरिकों और दुनिया के 25 देशों के 232 नागरिकों को सुरक्षित निकाला। भारतीय नौसेना, वायुसेना और विदेश मंत्रालय के बेहतर समन्वय और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की अगुवाई में मिली इस सफलता ने विश्वमंच पर भारत का लोहा मानने के लिए मजबूर कर दिया है।

bharat-sarkarउल्लेखनीय है कि यमन में गृह युद्ध की भनक लगते ही भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए योजनाबद्ध, सशक्त और व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। मोदी सरकार ने इस चुनौतीपूर्ण अभियान में समन्वय और दिशानिर्देश के लिए सेवानिवृत्त सेनाधिकारी जनरल वीके सिंह को नियुक्त किया। विदेश राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे जनरल वीके सिंह ने जिबूती में रहकर ‘ऑपरेशन राहत’ अभियान में दिशानिर्देशक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभियान के तहत जनरल सिंह का जिबूती से सना (यमन की राजधानी) कई बार आना जाना हुआ और उन्होंने अभियान की गति बनाए रखी। उन्होंने नौसैनिक पोतों तथा वायुसेना एवं एयर इंडिया के विमानों में यात्रियों से मुलाकात भी की।

‘ऑपरेशन राहत’ और भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना ने यमन के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए ‘ऑपरेशन राहत’ अभियान की योजना बनाई। इस अभियान को दो चरणों में पूरा किया जा रहा है। यमन के हालात पर नज़र रखने के लिए भारत सरकार ने एक 24 घंटे के नियंत्रण कक्ष भी बनाया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘ऑपरेशन राहत’ अभियान शुरू होने के पूर्व यमन में लगभग 4100 भारतीय थे। सोमवार 6 अप्रैल को भारत ने करीब 1052 और 7 अप्रैल को 1100 से अधिक भारतीय नागरिकों को यमन से सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई। पाकिस्तान के नौसेना ने भी जहां 11 भारतीयों को यमन के मुकल्ला से सुरक्षित निकाला, वहीं पाकिस्तान की ओर से उसके नागरिकों को निकालने का कोई आग्रह प्राप्त नहीं होने के बावजूद भारत ने बचाव अभियान के दौरान कुछ पाकिस्तानियों को भी वहां से निकाला है। भारतीय नौसेना द्वारा युद्धग्रस्त यमन से अबतक 4000 भारतीयों को सुरक्षित भारत पहुंचा दिया गया है। इसके साथ ही भारतीय नौसेना ने 25 देशों के 232 नागरिकों को भी हिंसाग्रस्त यमन से सुरक्षत निकाला।

Evacuees_Lining_up_for_embarking_INS_Sumitraयमन की भौगोलिक स्थितियां अलग-अलग होने के कारण भारतीय नौसेना ने इस ऑपरेशन के लिए विमानों और पानी के जहाजों को सेवा में लगाया। भारत ने इस अभियान के लिए पांच जहाज और चार विमान तैनात किए, जिसमें भारतीय नौसेना के दो विध्वंसक पोत आईएनएस मुंबई और रडार की पहुंच से बाहर रहनेवाले आईएनएस तर्कश, एक तटीय गश्ती जलपोत आईएनएस सुमित्रा के साथ ही दो यात्री जहाजों को सेवा में लगाया गया। इसके अतिरिक्त कवारत्ती और कोरल नाम के दो व्यापारी जहाज को भी यमन रवाना किया गया।

इस अभियान के तहत भारतीय वायु सेना ने जहां दो सी-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान को  तैनात किया वहीं एयर इंडिया ने यमन की राजधानी सना से भारतीयों को जिबूती पहुंचाने के लिए मस्कट में 180 सीट वाले दो एयरबस ए320 विमानों को सेवा में लगाया।

yaman-1पहले चरण में जहां नौसेना और असैन्य जहाजों द्वारा अदन, अल मुकल्ला और अल हुदैदाह से जिबूती लाया गया, वहीं वायुसेना एवं एयर इंडिया के विमानों से नागरिकों को यमन से जिबूती लाया गया। इसके बाद दूसरे विमानों के माध्यम से उन्हें कोच्चि, चेन्नई, मुंबई एवं अन्य स्थानों पर भेजने का प्रबंध किया गया। नौसेना ने भारतीयों को अदन शहर से सुरक्षित निकालने के लिए 30-35 यात्रियों की क्षमता वाली दर्जनों छोटी नौकाओं को किराये पर लिया। जिबूती में भारतीय दूतावास ने इसके लिए प्रति घंटे के हिसाब से 700 डॉलर (44,219 रुपये) का भुगतान किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने बताया कि यमन के सुरक्षा हालात को लेकर बहुत चिंता थी, लेकिन भारतीय दूतावास ने अदन के अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया। नौसेना ने वहां के भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ समन्वय बिठाया। विदेश मंत्रालय के अनुसार यमन में रह रहे हर एक भारतीय को जब तक वहां से निकाल नहीं लिया जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा।

प्रधानमंत्री ने सराहा, 26 देशों ने मांगा सहयोग 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘ऑपरेशन राहत’ की सफलता के लिए विदेश मंत्रालय, नौसेना, वायुसेना,  एयर इंडिया, जहाजरानी, रेलवे और राज्य सरकारों के बीच समन्वय से बचाव कार्य की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस अभियान में प्रशासनिक एवं रक्षा अधिकारियों तथा संगठनों के योगदान को वह सलाम करते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने ट्विट कर बताया कि भारत को 26देशों की ओर से यमन से उनके नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद के अनुरोध मिले हैं। इन देशों में बहरीन, बांग्लादेश, क्यूबा, चेक गणराज्य, जिबूती, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, इराक, इंडोनेशिया,  आयरलैण्ड, लेबनान, मलेशिया, नेपाल, फिलीपीन्स,मालदीव, नीदरलैंड, रोमानिया, स्लोवेनिया,   श्रीलंका, सिंगापुर, स्वीडन, तुर्की, अमेरिका और खुद यमन भी शामिल है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि यमन में संघर्ष की आहट मिलते ही भारत, रूस और इंडोनेशिया ने सबसे पहले बचाव अभियान शुरू किया था।

modi_with_saudi_shah_salmanभारत की तटस्थता नीति और प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी के शाह से तालमेल 

यमन के हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के बीच युद्ध चल रहा है। सउदी ने यमन के सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी सेना को तैनात किया है। भारत को इस बात का एहसास था कि किसी के भी पक्ष में अपनी राय रखने से भारतीय नागरिकों के जीवन पर संकट आ सकता है, साथ ही भारत के विमानों और जहाजों को भी नुकसान हो सकता है। इस स्थिति में भारत ने किसी के पक्ष में बात न करते हुए तटस्थता की नीति अपनाई। भारत ने यमन और सउदी के बीच विवाद पर अपनी कोई स्थिति जाहिर नहीं की, जिसका हर मोर्चे पर भारत को लाभ मिला। भारत ने इस अभियान में यमन को अपना दुश्मन नहीं माना जिसके चलते भारत को अपने नागरिकों को वहां से सकुशल वापस लाने में सफलता मिली।

इन सभी हालातों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार सऊदी के शाह सलमान से सम्पर्क में बने रहे। प्रधानमंत्री मोदी की इस नीति ने युद्ध की स्थिति में भी भारतीय विमानों और जहाजों की सकुशल वापसी को सुनिश्चित कराने में अहम भूमिका निभाई। भारत और सऊदी अरब के प्रमुखों के बीच लगातार बातचीत इस अभियान की सफलता के लिए कारगर रही।

राहत कार्यों के अनुभवों से लाभ   

भारत को राहत और बचाव कार्य को कुशलतापूर्वक पूर्ण करने का अच्छा अनुभव है। हाल ही में भारत ने इराक में खूनी घमासान से भारतीयों को वापस लाने में जबरदस्त सफलता पाई थी। युद्धग्रस्त इलाकों से नागरिकों को सुरक्षित लाना काफी जोखिम भरा होता है। ऐसी स्थिति में भारत ने 2011 में लिबिया और 2006 में लेबनान में भी राहत कार्य को बड़ी कुशलतापूर्वक अंजाम दिया था। इन स्थितियों में भारत की खुफिया एजेंसियों ने दुनिया ने भी अहम भूमिका निभाई थी। भारत को पूर्व के अनुभवों का ‘ऑपरेशन राहत’ में लाभ मिला। भारत की खुफिया एजेंसियों ने अमेरिका और सउदी अरब की खुफिया एजेसियों की मदद से हर पल की जानकारी राहत और बचाव कार्यों में लगे अधिकारियों को दी, जिससे भारतीय नागरिकों को सकुशल स्वदेश वापस भेजने के अनेक योजनाओं को बनाने और कार्यान्वित करने सम्बन्धी त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को गति मिली।

yemen1यमन में संघर्ष क्यों?

यमन इस समय अपने ही देश के विद्रोहियों के विरोधी हमलों से सुलग रहा है। इस युद्ध के पीछे के कारणों को जानने से पूर्व यमन के सम्बन्ध में जानना होगा। यमन एक मध्य-पूर्व एशिया का एक मुस्लिम देश है। यमन की राजभाषा अरबी है और यहां की जनता इस्लाम मतावलंबी है। यमन के उत्तर में सऊदी अरब, पश्चिम में लाल सागर, दक्षिण में अरब सागर व अदन की खाड़ी और पूर्व में ओमान देश है। यमन की भौगोलिक सीमा में लगभग 200 से ज्यादा द्वीप भी शामिल हैं, जिनमें सोकोत्रा सबसे बड़ा द्वीप है। यमन की राजधानी सना है और इसके आलावा ताइज़, अल-हुदैदाह और बैत अल-फकीह प्रमुख शहर हैं।

हूति विद्रोहियों गत माह यमन के राष्ट्रपति अब्दराब्बुह मंसूर हादी को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके बाद हूति विद्रोहियों के भीषण हमलों के बीच यह खबर फ़ैल गई कि राष्ट्रपति मंसूर हादी का कोई अतापता नहीं है। ऐसी खबर है कि यमन के राष्ट्रपति मंसूर हादी ने कुछ दिनों पहले सऊदी अरब में शरण ली है।

YEMEN-SANKATयमन के बड़े इलाक़े पर पर शिया हूती विद्रोहियों और यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह की वफादार सेना का क़ब्ज़ा है। गत वर्ष 2014 के सितंबर में हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर केवल चार सप्ताह में कब्ज़ा कर लिया था। यमन के दक्षिणी क्षेत्र में शिया हूती विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए यमन के विदेश मंत्री रियाद यासिन ने अरब देशों से सहायता मांगी। जिसके बाद सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर बमबारी करना प्रारंभ कर दिया। सऊदी अरब के शाह सलमान ने बीते दिनों अरब लीग की बैठक में ऐलान किया था कि जब तक हूती विद्रोही पीछे नहीं हट जाते, तब तक उनके देश की अगुवाई में हवाई हमले जारी रहेंगे।

हूती विद्रोहियों ने यमन के जिस बड़े शहर ताइज़ पर क़ब्ज़ा कर लिया वह रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ताइज़ शहर यमन की राजधानी सना और दक्षिणी शहर अदन के बीचोंबीच है। शहर का हवाई अड्डा जिस इलाक़े में हैं, वह भी इस समय हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। यमन में हूती विद्रोहियों ने जहां सरकारी सेना के ख़िलाफ़ सैन्य हमले तेज कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब की ओर से यमन की सरकार के पक्ष में हवाई हमले हो रहे हैं।

हूती शिया मुसलमानों की एक उप-शाखा ज़ैदी समुदाय से है। अल-क़ायदा और अन्य सुन्नी चरमपंथी समूह उनके ख़िलाफ़ हैं।

मेरा यह लेख newsbharati में 8 अप्रैल, 2015 को प्रकाशित हुआ था, अपने इस ब्लॉग में इसे आज बहुत विलम्ब से प्रकाशित कर रहा हूं।

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