भारतरत्न डॉ.कलाम को शब्दसुमनों से भावभीनी श्रद्धांजलि

dr-kalmभारत के महान वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम 27 जुलाई को निधन हो गया। डॉ.कलाम एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिनपर सम्पूर्ण देश को गर्व है। डॉ.कलाम को बच्चे, बूढ़े, युवा, धनवान, गरीब, राजनेता, अभिनेता और संत समाज सभी प्रेम करते थे। अब जब वे संसार को अलविदा कह गए समूचा देश शोकमग्न है। देश के सभी राजनीतिज्ञ, कलाकार, संत समाज, सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोग और वैज्ञानिक समुदाय अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। समाचार चैनलों में कल रात से ही देश के कई महानुभावों द्वारा डॉ.कलाम को दी गई श्रद्धांजलि स्वरूप प्रतिक्रियाओं को दिखाया जा रहा है।

DR. APJ ABDUL KALAM  इससे अलग सोशल मीडिया में सक्रिय लोग डॉ.कलाम को भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अपने अश्रुपूर्ण भावों को शब्दों द्वारा व्यक्त करनेवाले सामान्य लोग अपने ट्विटर, फेसबुक में हजारों की तादात में अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। सोशल साइट्स पर डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि देनेवाले सन्देश की बाढ़ सी आ गई है। कुछ संदेश यहां प्रस्तुत है :-

1) हे राष्ट्रऋषि,

याद रहेगा तेरी यह बालसुलभ मुस्कान।

धन्य तेरी भारतभक्ति, धन्य तेरा ज्ञान-विज्ञान।

तेरा यूं ही अचानक जाना बहुत दर्द दे गया,

हे कलाम तुझको शत-शत प्रणाम।।

2) आज मौसम भी पूरा दिन रोया है,

मेरे देश ने कलाम खोया है।

3) लिखूं तो रोए कलम, कहां गए कलाम।

अक्षर संग कागज करे, आंसू भरे सलाम।।

4) कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हंसे हम रोए!

ऐसी करनी कर चलो, कि हम हंसे जग रोए!!

डॉ. कलाम ने संत कबीर के इस वाणी को चरितार्थ किया…

5) कलाम को सलाम, उस ऊर्जा को सलाम।

उस सितारे को सलाम जिसने करोड़ों सपनों को दिशा दी।।

6) मैं धन्य हूं जो कलाम के युग को जी सका,

चलो देश की शान मैं कुछ काम हो जाएं,   

आओ हम सब भी एक बार कलाम हो जाएं।

7) शब्दों में क्षमता नहीं, सांचे मन सलाम,

आज नीर हर आंख में, कोटिक नमन कलाम।

8) मेरी ख़ुशबू तुम्हें खिलाएगी गुलाबों की तरह,

तुम अगर ख़ुद से न बोलोगे तो याद आऊंगा।

9) आधुनिक भारत के महामहिम चले गए,

इस देश के असली स्वाभिमान चले गए।

10) धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चले गए,

एक साथ गीता और कुरान चले गए।।

11) तेरे दिखाए रास्ते पर ये देश दूर तक जाएगा,

तुझको ए कलाम हिन्दुस्तान ना भूल पाएगा।

12) शब्दों में क्षमता नहीं, सांचे मन सलाम।

आज नीर हर आंख में, कोटिक नमन कलाम।

13) तुझे दफ़न करूं या चन्दन पर दाह करूं,

तू कर्म से तो हिन्दू है, क्या तुझे गंगा में प्रवाह करूं।

14) ख्वाब तो ख्वाब होते हैं, ख़्वाबों की ताबीर लिख गए।

ऐसा किया ‘कलाम’ कि हिंद की तकदीर लिख गए।।

15) कुछ और नहीं, बस ”कलाम” लिखने का मन करता है।

उदास बहुत है मन, बस ”सलाम” लिखने का मन करता है।।

16) टूट गया एक और तारा आज हिन्द के आसमान से।

महकता रहेगा ये चमन कलाम सर आपके नाम से।।

17) कमाल के कलाम थे वो,

ज़िन्दगी भर इतने काम नेक कर गए।

अलविदा कहते वक़्त भी कुछ पल को ही सही

सभी देशवासियों को एक कर गए।।

18) आज समय का पहिया घूमा, पीछे सब कुछ छूट गया।  

एक सितारा भारतमाता की आंखों का टूट गया।

19) डॉ. कलाम, कमाल की पहचान थे।

हिन्द की आन, बान और शान थे।

सुख-सपनों के वो मिसाइल मैन थे,

बच्चों की धड़कन, युवाओं के उड़ान थे।।

20) मजहब के नाम पे बांटनेवालों को एक जवाब है।  

वो रो रहा हिंदू हैं देखो जो मर गया मुसलमान है।।

21) नहीं शरीयत में उलझा वो, अपनी कीमत भांप गया।

कलम उठाकर अग्निपंख से अंतरिक्ष को नाप गया।

था बंदा इस्लाम का लेकिन कभी न ऐंठा करता था,

जब जी चाहा संतों के चरणों में बैठा करता था।।

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