देशद्रोहियों का अड्डा ‘जेएनयू’, गद्दारों पर कार्रवाई हो या जेएनयू को बंद करो

afjal-jnuहम सरकार को इसलिए टैक्स देते हैं कि सरकार हमारे रुपयों से राष्ट्र की गरिमा और उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और राष्ट्र रक्षा के लिए योजना बनाएं और उसके कार्यान्वयन के लिए व्यय करें। लेकिन केन्द्र सरकार के अधीन एक सरकारी विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के बहुत से देशविरोधी छात्र-छात्राएं भारत की गरिमा को चुनौती देते हुए हमारे महान राष्ट्र की बर्बादी के नारे लगाए जाते हैं। भारत के अविभाज्य अंग, देश का सिरमौर कश्मीर को भारत से अलग करने की कसमें खाए जाते हैं। यही कारण है कि भारत विरोधी नारों का अड्डा बन चुके जेएनयू परिसर प्रत्येक भारतवासी के हृदय को आहत करनेवाला स्थान बनकर रह गया है।

हाल ही में, जेएनयू में 9 फरवरी को वामपंथी तथा कथित सेक्यूलरिज्म के नशे में चूर सैंकड़ों छात्र-छात्राएं आतंकवादी अफजल गुरु को शहीद के रूप में प्रतिष्ठित कर रहे थे। केन्द्र व दिल्ली सरकार और पुलिस के नाक के नीचे भारत विरोधी नारे लगाकर देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का अपमान कर रहे थे। आतंकवादी अफज़ल गुरू, जो भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े प्रतीक यानी संसद पर हमले का दोषी था और जिसे 11 वर्ष तक चले मुकदमे के बाद देश के सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी की सज़ा सुनाई थी, और 9 फरवरी, 2013 को अफज़ल गुरू को फांसी दे दी गई थी। उसी आतंकवादी अफज़ल गुरू को जेएनयू के अन्दर हीरो बनाया जा रहा है। उसी जेएनयू के अन्दर कश्मीर की आज़ादी और भारत की बर्बादी की कसमें खाई जा रही हैं, पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लग रहे हैं। देशद्रोही विद्यार्थियों के गो बैक इंडिया, कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी, भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जैसे नारों ने पूरे कैंपस में बवाल खड़ा कर दिया। इसके बाद छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीविपी) के विद्यार्थियों ने इन देशद्रोहियों का तीखा विरोध किया।

मंगलवार, 9 फरवरी को जेएनयू के अंदर क्या-क्या हुआ? किस तरह के नारे लगाए गए और कैसे भारत विरोधी एजेंडा चलाया गया, ये जानना हर भारतीय के लिए बहुत आवश्यक है। क्योंकि जेएनयू के देशद्रोहियों के समर्थन में पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी हाफिज सईद और पाकिस्तान रक्षा विशेषज्ञ डॉ.ए.क्यू.खान आगे आया है। भारत के सबसे बड़े दुश्मन हाफिज सईद ने इसका समर्थन करते हुए ट्विट कर कहा है कि हम अपने पाकिस्तानी भाइयों से विनती करते हैं कि वो #SupportJNU पर ट्वीट करें और जेएनयू के पाकिस्तान समर्थक भाइयों का साथ देंगे। इसके अतिरिक्त हाफिज ने #PakStandWithJNU को बढ़ावा देने की भी अपील की है। हाफिज के इस ट्वीट से स्पष्ट होता है कि भारत विरोधी नारे लगानेवालों को किसका संरक्षण प्राप्त है।

देश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटीज़ में एक जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारे लग रहे थे, जब देश की सेना का एक बहादुर जवान हनुमनथप्पा जेएनयू से सिर्फ़ 8 किलोमीटर दूर आर्मी के रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे थे। पूरा देश उस समय सियाचिन के हीरो लांसनायक हनुमनथप्पा की ज़िंदगी के लिए दुआएं मांग रहा था। लेकिन जिस दिल्ली में हनुमनथप्पा अपनी ज़िंदगी की लड़ाई लड़ रहे थे, उसी दिल्ली के अंदर जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में आतंकवादी अफ़ज़ल गुरू की बरसी मनाई जा रही थी। जिस देश के लिए हनुमनथप्पा अपनी जान पर खेल गए उस देश के खिलाफ जेएनयू के अंदर नारे लगाना, बेहद शर्मनाक है।

यह एक ऐसी घटना है जिसे देखकर पीड़ा होती है। लेकिन आश्चर्य है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को छोड़कर हमारे देश की सबसे पुरानी राजनीतिक दल कांग्रेस पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), आम आदमी पार्टी जैसे जिम्मेदार विपक्षी पार्टी इस मुद्दे पर खामोश रहे। जबकि ये तमाम विपक्षी दल दादरी की घटना और रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद ये सभी राजनीतिक दल वोटबैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए अपना सिर पिट रहे थे, विरोध कर रहे थे। पर ये सारे राजनीतिक दल जेएनयू के देशद्रोही गतिविधियों से कन्नी काटते हुए दुबककर खामोश बैठे रहे, लेकिन केन्द्र सरकार ने देश विरोधी नारों में लिप्त कन्हैया कुमार और कुछ छात्रों को गिरफ्तार किया तो नजारा ही बदल गया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जेएनयू में जाकर भारतविरोधी नारे लगानेवालों का समर्थन किया और कहा कि सबसे ज्यादा राष्ट्रविरोधी लोग वो हैं जो इस संस्थान में छात्रों की आवाज दबा रहे हैं। राहुल गांधी इस समय तुच्छ राजनीति पर उतर आए हैं, वे भारतविरोधी नारों को छात्रों की आवाज बता रहे हैं, वहीं अन्य विपक्षी दल मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राष्ट्रीय सचिव डी. राजा और जनता दल युनाइटेड (जद-यू) के महासचिव के. सी. त्यागी सरकार को संसद में चुनौती देने की बात कर रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल ने अपने ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि मोदी सरकार को छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी भारी पड़ सकती है।

यह बहुत दुखद और लज्जास्पद है कि हमारे देश में राष्ट्रप्रहरी नायकों के बलिदान की अनदेखी होती है और एक आतंकवादी की कद्र होती है। देश के अंदर लोग यदि आतंकवादियों को अपना हीरो बनाते रहेंगे तो फिर उन्हें सियाचिन जैसी हड्डियां गलाने वाली जगहों पर, सीना तान कर खड़े रहने की प्रेरणा और साहस कहां से मिलेगा? हम देशवासियों को वोट बैंक की सियासत करनेवाले इन राजनीतिक दलों की मंशा को समझना ही होगा और इनका प्रतिकार भी करना होगा, यह बहुत जरुरी है।

जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में एक छात्र की पढ़ाई पर सरकार कितना पैसा ख़र्च करती है, यह भी हमें जानना चाहिए। ये रुपये देश की जनता की जेब से टैक्स के तौर पर जाता है यानी देश के पैसों से पढ़ने वाले छात्र हमारे देश के टुकड़े करने की बात कर रहे हैं। जेएनयू को प्रतिवर्ष सरकार से लगभग 244 करोड़ रुपये की राशि सब्सिडी के रूप में प्राप्त होती है। जेएनयू में 8 हज़ार, 308 छात्र पढ़ते हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो एक छात्र की पढ़ाई पर सरकार लगभग 3 लाख रुपये ख़र्च करती है। देश के पैसों से चलनेवाले इस यूनिवर्सिटी का क्या औचित्य है, जहां भारत विरोधी गतिविधियां उत्सव के रूप में मनाए जाते हैं। हमें इस बात पर विचार करना होगा कि देशविरोधी गतिविधियों के अड्डे के रूप में स्थापित हो रहे जेएनयू पर हम खर्च क्यों करें? जेएनयू केन्द्र सरकार के अधीन है, केन्द्र सरकार और मानव संसाधन मंत्रालय ने आगे आकर इसपर कठोर एक्शन लेना चाहिए और जेएनयू के भीतर पल रहे देशद्रोहियों को दण्डित करना चाहिए या जेएनयू को बंद कर देना चाहिए।

– लखेश्वर चंद्रवंशी   

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