‘स्वतंत्रता’ का सन्देश देता ‘श्रीकृष्ण’ का जीवन

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ। पर स्वतंत्र होने तथा अपनों को दुःख की बेड़ियों से मुक्त करने की चाह … पढ़ना जारी रखें ‘स्वतंत्रता’ का सन्देश देता ‘श्रीकृष्ण’ का जीवन

स्वाधीनता आन्दोलन और उसके मोल को क्या हम समझ पाए?

(15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस पर विशेष) स्वतंत्रता सबको प्रिय है। क्योंकि स्वतंत्रता मनुष्य का स्वभाव है। यही कारण है कि … पढ़ना जारी रखें स्वाधीनता आन्दोलन और उसके मोल को क्या हम समझ पाए?

राष्ट्र व संस्कृति की रक्षा का संकल्प

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरूजी गोलवलकर के अनुसार, “राष्ट्र सांस्कृतिक ईकाई होती है। जब किसी जनसमूह … पढ़ना जारी रखें राष्ट्र व संस्कृति की रक्षा का संकल्प

मन वाचा कर्म से सदैव एक रूप हो : मा.भानुदासजी

मन वाचा कर्म से सदैव एक रूप हो : मा.भानुदासजी मैं कौन हूं? मेरे इस जीवन में मेरी क्या भूमिका … पढ़ना जारी रखें मन वाचा कर्म से सदैव एक रूप हो : मा.भानुदासजी

शिव सुंदर नव समाज विश्ववंद्य हम गढ़ें : मा.निवेदिता दीदी

शिव सुंदर नव समाज विश्ववंद्य हम गढ़ें : मा.निवेदिता दीदी 123 वर्ष पूर्व तीन दिन-तीन रात ध्यानस्थ रहकर स्वामी विवेकानन्दजी … पढ़ना जारी रखें शिव सुंदर नव समाज विश्ववंद्य हम गढ़ें : मा.निवेदिता दीदी

‘वयं सुपुत्रा अमृतस्य नूनं’ का सन्देश लेकर जाएं : मा. बालकृष्णनजी

वयं सुपुत्रा अमृतस्य नूनं,सेवाव्रती, जीवनव्रती, वानप्रस्थी पढ़ना जारी रखें ‘वयं सुपुत्रा अमृतस्य नूनं’ का सन्देश लेकर जाएं : मा. बालकृष्णनजी

सेवा के लिए समर्पण की नित्य साधना करनी होगी : मा. पी.परमेश्वरन

अभावग्रस्त लोगों की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन समर्पित करना है। ऐसे समर्पण की नित्य साधना करनी होगी। ऐसे समर्पण का भाव अपने भीतर विद्यमान दिव्यत्व की अनुभूति से प्रगट होता है। सारे समर्पित कार्य का स्रोत अपने हृदय की प्रेरणा होती है। पढ़ना जारी रखें सेवा के लिए समर्पण की नित्य साधना करनी होगी : मा. पी.परमेश्वरन